पटना, (रिपोर्टर) :  संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है किन्तु मौजूदा समय में संस्कृत ही उपेक्षित है। कहा जाता है कि संस्कृत ही संस्कृति का रक्षक है। लेकिन बिहार में कोई भी संस्कृत मानद विश्वविद्यालय नहीं है। जिसके कारण बिहारी छात्रों को अन्य प्रदेशों में जाने को विवश है। ऐसे में ब्रम्हजन एकता परिषद के अध्यक्ष प्रज्ञ समाज समन्वय समिति के सक्रिय सदस्य समाजिक विचारक श्री जे एन त्रिवेदी ने बिहार में नये संस्कृत मानद विश्वविद्यालय शुरू करने की कवायद शुरू कर दी है। बता दे कि प्रज्ञ समाज समन्वय समिति ब्राह्मण संगठन की बैठक गांधीनगर बोरिंग कैनाल रोड में संगठन के सदस्यों की मौजूदगी में किया गया जिसकी अध्यक्षता समन्वय समिति के अध्यक्ष श्री आर.एन .मिश्रा ने किया । इस बाबत श्री जे एन त्रिवेदी ने बताया कि आज यह चिंता का विषय है कि बिहार जैसे ऐतिहासिक राज्य जहां चाणक्य जैसे विद्वान थे संस्कृत विलुप्ति के कगार पर है।  श्री त्रिवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना का कार्य शुरू हो रहा है इसी सिलसिले में प्रबुद्घ जनों की एक बैठक बुलाई गयी जिसमें निर्णय हुआ कि विश्वविद्यालय का निर्माण अंतरराष्ट्रिय स्तर पर हो। इसी सिलसिले में त्रिवेदी जी शिष्टमंडल के साथ कांची पीठ के शंकराचार्य से 3 मार्च को उनसे मिलने के लिए प्रस्थान करेंगे  उसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फलस्वरूप बिहार को एक उत्कृष्ठ सभी सुविधाओं से सुसज्जित विश्वविद्यालय मिलेगा।  मौके पर प्रज्ञ समाज समन्वय समिति के युवा प्रदेश अध्यक्ष रजनीश तिवारी ने कहा कि ये बहुत बड़ी सोच है ख़ासकर बिहार के लोगो को इस संस्कृत मानद विस्वविद्यालय का बहुत बड़ा लाभ होगा इस विस्वविद्यालय के माध्यम से समाज के लोग  वैदिक औऱ तकनीकी तरीके भी  से संस्कृत का ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे रिसर्च कर सकेंगे लोगो मे इस विश्वविद्यालय के प्रति रूचि और अभिलाषाय भी रहेंगी अगर ऐसे विस्वविद्यालय खुलता है तो बिहार और देश की गौरव बढ़ाने वाली बात होगी। प्रज्ञ समाज समन्वय समिति के बैठक मे पंडित जी पांडेय, राजेंन्द्र तिवारी,युवा प्रदेश अध्यक्ष रजनीश तिवारी अमरेन्द्र कुमार त्रिपाठी ,सौरभ तिवारी, सहित दर्जनों ने इस गंभीर विषय पर अपनी सहमति प्रकट की।


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